यशस्वी जायसवाल का जीवन परिचय और उनके संघर्ष की कहानी

By | February 6, 2020

यशस्वी जायसवाल का जन्म 28 दिसंबर 2001 को हुआ था, यशस्वी जायसवाल के पिता का नाम भूपेंद्र कुमार जायसवाल है, यशस्वी जायसवाल मुंबई और राजस्थान रॉयल्स की और से खेलेंगे, यशस्वी जायसवाल ने अंडर-19 वर्ल्ड कप में तीन अर्धशतक और एक शतक लगाया, यशस्वी जायसवाल ने गोल गप्पे भी बेचे, यशस्वी जायसवाल ने आजाद मैदान के टेंट में रहकर पूरा किया क्रिकेट का सफर|

यशस्वी जायसवाल का परिचय एक नजर में-

नाम यशस्वी जायसवाल
जन्म तिथि28 दिसम्बर 2001
पिता का नाम भूपेन्द्र कुमार यशस्वी जायसवाल
माता का नाम कंचन जायसवाल
प्रशिक्षकज्वाला सिंह
टीमराजस्थान रॉयल्स (वर्ष 2020 के लिए गया), मुंबई

Contents

यशस्वी जायसवाल का बचपन कैसे गुजरा जाने पूरी कहानी-

यशस्वी जायसवाल का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य भदोही जिले केसुरियावां गांव में भूपेन्द्र कुमार जायसवाल और कंचन जायसवाल के घर 28 दिसम्बर 2001 को हुआ था, यशस्वी जायसवाल के पिता एक पेन्ट व्यवसायी है, यशस्वी जायसवाल का बचपन से ही सपना था, कि वो बड़ा होकर एक क्रिकेटर बनेगा |

लेकिन दोस्तों यशस्वी जायसवाल के परिवार की ऐसी हालत नहीं थी, की किसी बड़े शहर में रहकर क्रिकेट की तैयारी  कर सके | फिर भी यशस्वी जायसवाल ने अपनी बात पिता से साझा करी, कि मुझे क्रिकेटर बनना है, यशस्वी जायसवाल के पिता ने भी उसकी बात मान ली और यशस्वी जायसवाल को मुंबई में अपने एक रिश्तेदार के पास रहने के लिए भेज दिया था |

बस यहीं से फिर यशस्वी जायसवाल के जीवन के संघर्ष का सफर शुरू होता है | पूरी कहानी आप नीचे के पैराग्राफ में पढ़ सकते है|

यशस्वी जायसवाल को करना पड़ा डेयरी पर काम-

आपने अब तक पढ़ा यशस्वी जायसवाल का क्या सपना था-अब आप इस पैराग्राफ में यशस्वी जायसवाल के संघर्ष के बारे में पढ़ेंगे | 

यशस्वी जायसवाल अपने रिश्तेदार के पास मुंबई तो आ गए थे, लेकिन रिश्तेदार के पास भी इतनी जगह नहीं थी, कि वहां पर यशस्वी जायसवाल भी रह सके | फिर एक दिन यशस्वी जायसवाल कालबादेवी इलाके में एक डेयरी में गए, लेकिन वहां पर यशस्वी जायसवाल को एक शर्त पर ही जगह मिली की यशस्वी जायसवाल को वहां पर काम भी करना पड़ेगा |

यशस्वी जायसवाल ने काम के लिए हाँ तो भर ली, लेकिन आप ही जानते हो, कि दिनभर खेलने के बाद कोई आदमी कैसे काम कर सकता है,आखिर वो तो 11 साल का बच्चा था | यशस्वी जायसवाल पुरे दिन का थका हारा शामको सो जाता था, लेकिन यह सब डेयरी के मालिक को रास नहीं आया और एक दिन उसने यशस्वी जायसवाल को बोल दिया की आप अपना ठिकाना कहीं और देखो| 

यशस्वी जायसवाल को रहना पड़ा मुंबई क्रिकेट की नर्सरी में-

अब तक अपने देखा की किस प्रकार यशस्वी जायसवाल मुंबई तक आया और कैसे उसको निकाला गया|

इस पैराग्राफ में हम आपको यशस्वी जायसवाल के आगे के जीवन में और किन किन कठिनाइयों सामना करना पड़ा उसके बारे में बताएँगे|

यशस्वी जायसवाल को डेयरी मालिक के द्वारा निकलने के उसको नए ठिकाने के रूप में मुंबई क्रिकेट की नर्सरी मिली (आजाद मैदान) | अब यशस्वी जायसवाल इस मैदान के टेंट में रहने लगे थे, लेकिन यहाँ पर शर्ते यशस्वी जायसवाल का पीछा कहाँ छोड़ रही थी |

यहाँ भी यशस्वी जायसवाल को शर्त मिली की अच्छा प्रदर्शन करके दिखाना होगा | यशस्वी जायसवाल इस मैदान में दिनभर क्रिकेट खेलते थे, और फिर रात में इसी मैदान के टेंट में सो जाते थे | यहाँ पर यशस्वी जायसवाल को खाना बनाने का काम भी दिया गया था | 

अपने जेब खर्चे के लिए यशस्वी जायसवाल को यह काम भी करना पड़ा-

आपने अब तक पढ़ा की कैसे यशस्वी जायसवाल को मुंबई शहर में आने के किन किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा | लेकिन मुश्किलें अभी भी पीछा नहीं छोड़ रही थी| यशस्वी जायसवाल के पिता भूपेंद्र कुमार जायसवाल भी यशस्वी जायसवाल को कुछ पैसे भेजते थे,

लेकिन उन पैसो से यशस्वी जायसवाल का खर्चा चल नहीं रहा था, फिर यशस्वी जायसवाल ने अपने पिता से और पैसे भेजने के लिए नहीं कहा | क्योंकि वो जानते थे, कि पिताजी जो पैसे भेज रहे है, वो भी अपनी और से ज्यादा से ज्यादा भेज रहे है| 

बोल ढूंढकर पैसे कमाये –

अब आपके मन में यह सवाल जरूर आया होगा, कि बोल ढूंढकर कैसे पैसे कमाए | आजाद मैदान में अक्सर बोल खो जाती थी, और बोल को ढूंढकर देने वाले को कुछ रूपये दिए जाते थे, बोल ढूंढने वाले काम अक्सर यशस्वी जायसवाल की किया करता था | 

फिर बात करे तो मैच में अच्छा प्रदर्शन करने पर मैन ऑफ़ द मैच के रूप में भी इनाम के रूप में पैसे दिए जाते थे| 

गोल गप्पे बेचकर कमाए पैसे-

इससे पहले आपने देखा की किस प्रकार यशस्वी जायसवाल ने पिता के द्वारा भेजे गए पैसो के अलावा भी कमाई करि थी, लेकिन अब आप इस पैराग्राफ आपको पढ़ने को मिलेगा, कि यशस्वी जायसवाल ने गोल गप्पे बेचकर भी पैसे कमाए थे |

आपको बता दे कि, आजाद मैदान में होने वाली रामलीला के दौरान यशस्वी जायसवाल ने गोल गप्पे भी बेचे थे | की बार क्या होता था, की जिस जगह यशस्वी जायसवाल गोल गप्पे बेच रहा होता है, वहां पर यशस्वी जायसवाल के साथ खेलने वाले उसके दोस्त भी आ जाते थे,

लेकिन यशस्वी जायसवाल उन दोस्तों को देखकर ठेला छोड़कर भाग जाता था | ठेला मालिक के द्वारा पूछने पर यशस्वी जायसवाल एक ही बात कहता था, की में कोई भी काम कर सकता हूँ, लेकिन दोस्तों को मेरे हाथो से गोल गप्पे नहीं खिला सकता | 

यशस्वी जायसवाल के जीवन का टर्निंग पॉइंट क्या था-

आपने अब तक देखा, कि यशस्वी जायसवाल का जीवन संघर्ष जारी था, लेकिन इसके बावजूद यशस्वी जायसवाल कोई खास पहचान नहीं मिली थी | और घर वालो की और से भी बुलावा आ गया था, की आप घर आ जायो | इसी दौरान आजाद मैदान पर अभ्यास के दौरान एक दिन उन पर कोच ज्वाला सिंह की नजर यशस्वी जायसवाल पर पड़ी | 

 ज्वाला सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से करीब दो दशक पहले मुंबई आए ज्वाला सिंह, यशस्वी जायसवाल के खेल से प्रभवित हुये और उन्होंने यशस्वी जायसवाल को कोचिंग देने का निर्णय लिया | अब और क्या था, यहीं से इस युवा प्रतिभावान खिलाडी के दिन बदलने शुरू हो गए थे | कोच ज्वाला सिंह की कोचिंग से यह युवा खिलाडी अपनी प्रतिभा को निखारता गया और आज इस मुकाम तक आ पंहुचा है | 

किस प्रकार यशस्वी जायसवाल का बचपन का सपना पूरा हुआ-

अब तक आपने देखा कि, किस प्रकार यशस्वी जायसवाल ने घर जाने का मन बनाया और फिर कोच ज्वाला सिंह की नजर पड़ी और फिर यशस्वी जायसवाल को अपनी प्रतिभा दिखने का मौका मिला | अब हम आपको बताएँगे, कि कैसे इस युवा खिलाड़ी के सपने अधूरे सपने पूरे होते गए| 

जब यशस्वी जायसवाल को श्रीलंका के खिलाफ अंडर-19 वर्षीय टीम में खेलने का मौका मिला था, तो यह यशस्वी जायसवाल के लिए किसी सपने से कम नहीं था | मौका तो मिला लेकिन शुरुआती मैचों में यशस्वी जायसवाल पूरी तरह से अपनी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा था,

वो अपने बैट से कुछ खास नहीं कर पाया था | और यशस्वी जायसवाल को चौथे मैच में टीम से बाहर कर दिया गया था | कब पांचवें मैच में फिर से यशस्वी जायसवाल को टीम में मौका मिला तो, यशस्वी जायसवाल एक पास करो या मरो के आलावा करने को कुछ नहीं था, उन्होंने उस मैच में ना केवल शतक लगाया, बल्कि टीम को सीरीज भी जीता दी थी | 

यशस्वी जायसवाल का सपना भारतीय टीम में जगह बनाना-

कहा जाता है, कि इंसान चाहे तो कुछ भी कर सकता है-उसके सामने दुनिया का कोई भी काम मुश्किल नहीं है | और यश सब आज यशस्वी जायसवाल ने कर दिखाया है | 

आपने अब तक पढ़ा कि, कैसे यशस्वी जायसवाल (एक छोटे बच्चे ने क्रिकेट खेलने का सपना देखा) और फिर किन किन मुश्किलों का सामना किया और फिर बन गया एक कामयाब क्रिकेटर | 

इसके बाद 2018 में ही हुए अंडर 19 एशिया कप में यशस्वी प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे। इंग्लैंड में हुई ट्राई सीरीज में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। यहां सात मैचों में उन्होंने चार अर्धशतक लगाए। विजय हजारे ट्रॉफी के इस सीजन में भी उनका बल्ला जमकर बोल रहा है। इस दोहरे शतक से पहले इसी सीजन में वह तीन शतक जमा चुके हैं। अब यशस्वी का एक ही सपना है। भारतीय टीम में जगह बनाना।

यशस्वी जायसवाल के जीवन परिचय से संबंधित पूछे जाने वाले सवाल?

यशस्वी जायसवाल का जन्म कब और किस स्थान पर हुआ?

28 दिसम्बर 2001 को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में हुआ |

यशस्वी जायसवाल के माता-पिता का क्या नाम है?

माता का नाम-कंचन जायसवाल और पिता का नाम-भूपेन्द्र कुमार जायसवाल

यशस्वी जायसवाल मुंबई गया तब कितने वर्ष का था?

10 वर्ष

यशस्वी जायसवाल के कोच का क्या नाम है?

ज्वाला सिंह

यशस्वी जायसवाल को आईपीएल में किस टीम ने खरीदा है?

राजस्थान रॉयल्स ने

यशस्वी जायसवाल ने अपनी जेब खर्चे के लिए कौन कौन से काम करे?

मैदान में बोल ढूढ़कर देना (बदले में पैसे मिलते थे) और गोल गप्पे बेचना |

यशस्वी जायसवाल ने पहला शतक किस टीम के खिलाफ लगाया था?

श्रीलंका के खिलाफ (पाँचवें मैच में) और टीम को जीत भी दिलाई|

यशस्वी जायसवाल अंडर-19 वर्ल्ड कप में कुल कितने शतक और अर्धशतक लगाए?

तीन अर्धशतक और एक शतक

यशस्वी जायसवाल के पिता क्या काम करते है?

पेंट व्यवसायी

यशस्वी जायसवाल के जीवन की पूरी कहानी हिंदी भाषा में पढ़नी है?

आप हमारी टीम द्वारा दी गई सूचना को पढ़ सकते है, यशस्वी जायसवाल के जीवन संघर्ष की पूरी कहानी हिंदी भाषा में उपलब्ध है|

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