राज्य कर्मचारी की तीसरी संतान को गोद देने के बाद भी उसी की मानी जाएगी-State Government ने Population Growth को रोकने के लिए परिपत्र जारी किया |

राज्य कर्मचारी की तीसरी संतान को गोद देने के बाद भी उसी की मानी जाएगी, अगर आप राज्य कर्मचारी हो और अपनी तीसरी संतान को गोद देते हो तो वह आपकी ही संतान मानी जाएगी, State Government ने Population Growth को रोकने के लिए परिपत्र जारी किया

राजस्थान राज्य में काफी दिनों से इस बात को लेकर विवाद चल रहा था कि दत्तक पुत्र को तीसरी संतान में शामिल किया जाएगा। अब राज्य सरकार के द्वारा दत्तक पुत्र को तीसरी संतान में शामिल करने को लेकर चल रही उलझन को सुलझा दिया गया है l राज्य सरकार के द्वारा यह फैसला लिया गया है, कि  किसी भी संतान को गोद लेने पर वह संतान राज्य कर्मचारी की तीसरी संतान में शामिल नहीं की जाएगी l अब आगे हम आपको इस मामले के बारे में पूरी जानकारी देते हैं।

Serial Division के  शासन सचिव के द्वारा जारी किया गया है परिपत्र

  • राज्य सरकार के द्वारा दत्तक पुत्र को तीसरी संतान में शामिल करने को लेकर चल रही उलझन को सुलझा दिया गया है। हाल ही में इस विषय में क्रमिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव हेमंत गेरा ने एक परिपत्र जारी किया है। अब स्पष्ट हो गया है कि अगर किसी भी राज्य कर्मचारी को 1 जून 2002 के बाद खुद की जैविक से तीसरी संतान पैदा हुई हैं और उसे संतान को किसी अन्य व्यक्ति को गोद दिया हैं तो गोद देने के बाद भी वह तीसरी संतान राज्य कर्मचारी की ही मानी जाएगी। इसी के साथ-साथ इस प्रकार के राज्य कर्मचारी को ना ही legal service rules के मुताबिक 5 साल तक Promote किया जाएगा।
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  • यदि कोई भी state employee अपनी दो संतानों के पश्चात भी शिशु ग्रह से किसी अनाथ बालक का लालन-पालन करने के लिए उसे तीसरी संतान के रूप में गोद लेता हैं तथा उस संतान को विधिक रुप से दत्तक पुत्र या पुत्री का दर्जा भी देता हैं , तो भी वह तीसरी संतान में नहीं मानी जाएगी।

जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए जारी किया परिपत्र

State Government के द्वारा Population Growth को रोकने के लिए 20 जून 2001 को National Population Policy के अनुरूप एक परिपत्र जारी किया था। इस परिपत्र के तहत तीसरी संतान होने के पश्चात पदोन्नति को रोकने का प्रावधान किया गया था , परंतु दत्तक पुत्र गोद लेने के बाद कई प्रकरणों में भी उलझन पैदा हुई थी।

इसी प्रकार के प्रकरणों का परीक्षण करा कर राज्य सरकार के द्वारा यह फैसला लिया गया था कि , अनाथ बालकों को दत्तक पुत्र के रूप में गोद लेने के कारण जनसंख्या में कोई भी वृद्धि नहीं होती। इसीलिए दत्तक पुत्र के रूप में बालक को गोद लिया जा सकता हैं।

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