Raksha Bandhan 2022 भाई-बहन का त्यौहार, शुभ महूर्त और त्यौहार से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी देखे |

Raksha Bandhan 2022 भाई-बहन का त्यौहार, भाई बहन का अटूट बंधन के Raksha Bandhan का त्यौहार मनाया जाता है, हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है, Raksha Bandhan के इतिहास से जुड़ी हुई है इंद्र देव की कहानी, रक्षाबंधन का शुभ महूर्त कब का है, रक्षाबंधन की सुंदर फोटो डाउनलोड करे |

हमारा भारत एक ऐसा देश है, जिसमें सभी त्यौहार बहुत धूमधाम से मनाया जाते हैं | वैसे तो भारत में त्योहारों की लिस्ट बहुत लंबी है, लेकिन भारत में कुछ ऐसे मुख्य त्योहार हैं जो बहुत अधिक प्रसिद्ध है | सभी प्रसिद्ध त्योहारों में से एक रक्षाबंधन त्योहार भी है | यह तो सब जानते ही हैं, कि Raksha Bandhan के दिन क्या किया जाता है, परंतु कुछ ही लोग ऐसे होंगे जो यह जानते होंगे कि Raksha Bandhan का इतिहास क्या है |

हमारे भारत में जितने भी त्यौहार मनाए जाते हैं, चाहे वह कोई छोटा त्यौहार हो या फिर बड़ा त्यौहार सभी त्योहारों के पीछे कोई ना कोई कहानी अवश्य ही जुड़ी हुई है | इसी प्रकार रक्षाबंधन का त्योहार मनाने के पीछे भी कुछ बातें जुड़ी हुई है, जिस कारण रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है | हर बहन और भाई को रक्षाबंधन के बारे में यह जरूर पता होना चाहिए, कि Raksha Bandhan का त्यौहार क्यों मनाया जाता है |

रक्षाबंधन का त्यौहार काफी कहानियों से जुड़ा हुआ है | अलग-अलग मतों के द्वारा अलग-अलग कहानियां रक्षाबंधन के त्यौहार के मनाए जाने का कारण मानी जाती हैं | आइए यह जानते हैं कि ऐसी कौन सी कहानिया है, जो रक्षाबंधन के इतिहास से जुड़ी हुई है, और जिस कारण रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है |

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    Raksha Bandhan का त्यौहार किस प्रकार मनाया जाता है और किस दिन मनाया जाता है l

    रक्षाबंधन का त्यौहार भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है | यह बात तो हर कोई जानता ही है कि Raksha Bandhan भाई- बहन का त्यौहार होता है | भारत के सभी लोग यह तो जानते है, कि रक्षाबंधन के दिन एक बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है | भाई अपनी बहन को वचन देता है कि वह हमेशा उसकी रक्षा करेगा और जब भी उसे कोई दुख दर्द होगा तो हमेशा उसका भाई उसके साथ खड़ा होगा | रक्षाबंधन भाई बहन के प्यार और बलिदान के लिए मनाया जाता है | आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Raksha Bandhan का त्यौहार हर वर्ष सावन के महीने में पूर्णिमा के दिन बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है |

    रक्षाबंधन के इतिहास से जुड़ी हुई है इंद्र देव की कहानी

    पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवताओं पर असुर राज बाली ने हमला कर दिया था, तो उस समय असुरों के हमले के कारण देवता इंद्र बहुत जख्मी हो गए थे और उन्हें काफी कष्ट भी हुए थे | जिस वजह इंद्र की पत्नी काफी परेशान हो गई और उनसे अपने पति इंद्र की यह हालत देखी नहीं जा रही थी | इंद्र की पत्नी ने यह सोचा क्यों ना वह इस युद्ध को समाप्त करने के लिए कुछ उपाय करें |

    Raksha Bandhan ki Images

    इस उपाय को ढूंढने के लिए इंद्र की पत्नी भगवान विष्णु जी के पास गई और भगवान विष्णु जी के पास जाकर उन्होंने कहां की आप कोई ऐसा मार्ग बताइए जिससे युद्ध समाप्त किया जा सके और इंद्र देव की रक्षा भी की जा सके | तभी विष्णु जी ने इंद्र जी की पत्नी जिनका नाम सची था उन्हें एक धागा दिया | भगवान विष्णु जी ने कहा कि यह धागा तुम अपने पति इंद्र की कलाई पर बांध देना इस धागे के कारण तुम्हारा पति इंद्र राजा बलि के आक्रमण से बच जाएगा और युद्ध समाप्त हो जाएगा |

    इंद्र की पत्नी ने भगवान विष्णु जी के बताए अनुसार ऐसे ही किया उसने इंद्र के हाथ में जैसे ही धागा बांधा तो युद्ध में राजा बलि हार गया | यही कारण था कि जब भी कोई राजा किसी युद्ध के लिए निकलता था तो वह सबसे पहले अपनी पत्नी या फिर बहनों से धागा बंधवाया करता था | धागा इसीलिए बंधवाया करते थे कि उनकी रक्षा हो | इसी प्रथा के चलते प्रथा ने अपना एक नया रूप लिया जिसे ही Raksha Bandhan कहा जाता है |

    जैसे पत्नियों ने अपने पति की कलाई पर धागा बांधकर उनकी रक्षा की कामना की थी वैसे ही बहने भी अपने भाई की कलाई पर रक्षा बंधन के दिन धागा बांध कर अपने भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं | Raksha Bandhan के दिन राखी हर भाई को यह याद दिलाती है कि उसे सदा अपनी बहन की रक्षा करनी है और हमेशा महिलाओं की इज्जत करनी है l बहने भी इस दिन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए और भाई के अच्छे जीवन की कामना करती हैं | भाई अपनी बहन को राखी के अवसर पर कुछ  भेट जरूर देता है और हमेशा अपनी बहन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा लेता है |

    रक्षाबंधन के इतिहास से जुड़ी हुई कृष्ण और द्रौपदी की कहानी

    कुछ कथाओं के अनुसार रक्षाबंधन के इतिहास से कृष्ण और द्रौपदी की कहानी को भी जुड़ा हुआ माना जाता है | कृष्ण जी का जब शिशुपाल के साथ युद्ध हुआ तो कृष्ण जी ने शिशुपाल को अपने हाथों से मार दिया था | जिस वजह से कृष्ण जी के हाथ पर कुछ चोट भी लगी थी और उनके हाथ खून से सना गए थे |

    द्रोपदी ने जब कृष्ण जी की ऐसी हालत देखी तो वह बहुत चिंतित हो गई और द्रोपदी ने कृष्ण जी का खून रोकने के लिए एक काम किया |  द्रोपदी ने कृष्ण जी की यह हालत देखकर अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ कर और कृष्ण जी की कलाई पर बांध दिया था | कहा जाता है, कि जब द्रोपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर कृष्ण जी की कलाई पर बांधा था तो कृष्ण जी ने उस समय द्रोपती को यह वचन दिया था, कि वह सदैव द्रोपदी की रक्षा करेंगे |

    कृष्ण जी ने द्रौपदी को यह वचन भी दिया कि हर मुसीबत में सबसे पहले उनकी रक्षा के लिए उनका साथ देंगे | कुछ कथाओं के अनुसार रक्षाबंधन के त्यौहार को मनाने के इतिहास का संबंध द्रोपदी और कृष्ण की कथा को भी माना जाता है | हमने आपको दो कथाओं के बारे में बताया है जो रक्षाबंधन के त्यौहार को मनाने के इतिहास के बारे में सबसे अधिक प्रचलित है | इन कथाओं के अलावा और भी कई कथाएं हैं जिन्हें Raksha Bandhan के त्यौहार का इतिहास माना जाता है |

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