जानिए निवेश करने के लिए पैसा NPS में लगाएं या फिर PF में ठीक रहेगा |

By | April 16, 2021

अक्सर लोगों को यह समझ नहीं आता कि निवेश करने के लिए पैसा कहाँ लगाएं, कुछ लोग Provident Fund में लगते है,लेकिन कुछ लोग अपना पैसा NPS में लगाते है, Investment के लिए पैसा कहाँ लगाना सबसे अच्छा रहेगा |

अधिकतर सभी लोग अपने बुढ़ापे को लेकर काफी चिंतित होते हैं कि वह बुढ़ापे में क्या करेंगे। क्योंकि बुढ़ापे के बारे में हमें जवानी में ही सोचना होता है। ऐसे में काफी बड़ा सवाल लोगों के सामने आता है और वह है कि रिटायरमेंट के लिए निवेश ऐसे किस प्लेटफार्म पर करें कि अच्छा खासा पैसा भी मिलता रहे। अब व्यक्ति के सामने दो ऑप्शन होते हैं।

पहला है PF ( Provident Fund ) और दूसरा है NPS ( National Pension System ) आज हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको यही बताने वाले हैं की इन दोनों में से कौन सी योजना बेहतर रहेगी। कोरोना काल के दौरान अब सभी लोगों कि समझ में यह बात तो आ ही गई है कि सेविंग होनी कितनी ज्यादा आवश्यक है।

Apna paisa PF & NPS me lagaye

परंतु यह भी समझना जरूरी है कि यदि हम अभी से ही रिटायरमेंट के बारे में अभी नहीं सोचेंगे, तो बाद में हमें पछताना भी पड़ सकता है। इस परिस्थिति में यदि आप कम उम्र में ही निवेश करना शुरू कर देते हैं। तो फिर आपको बुढ़ापे में काफी अधिक फायदा मिल पाता है, तो चलिए  अब हम जानते हैं, कि पीएफ ( PF ) तथा एनपीएस ( NPS ) इन दोनों में से कहां पर निवेश करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

पीएफ ( PF ) तथा एनपीएस ( NPS ) में निवेश ( Investment ) कौन कर सकता है ?

एनपीएस ( NPS ) में 18 साल की आयु से लेकर 65 वर्ष की आयु तक कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है। परंतु एनपीएस ( NPS )  की मैच्योरिटी ( Maturity )  60 साल की उम्र होने पर ही मिलती है भले ही आप 18 वर्ष की आयु से निवेश करना शुरू कर दें l अगर आप 50 वर्ष की आयु से भी निवेश करना शुरू करते हैं, तो भी आपको 60 वर्ष की आयु के बाद ही पैसे मिलेंगे। अगर हम बात करें पीएफ की तो PF में उम्र की कोई भी सीमा नहीं होती इसको कोई भी खुलवा सकता है। पीएफ ( PF )का लॉक इन पीरियड ( Lock In Period ) 15 साल का होता है।

पीएफ ( PF ) तथा एनपीएस ( NPS ) में से पैसे कब निकाल सकते हैं?

एनपीएस में से आप 7 साल की उम्र के पश्चात पैसे निकाल सकते हैं। परंतु 60 साल की उम्र के पश्चात भी आप सिर्फ 60% रकम ही निकाल सकते हैं। जबकि जो 40% रकम रह जाएगी उस रकम से आपको कोई इन्यूटी प्लान ( Inuty Plan ) लेना होगा, जिससे कि आपको जिंदगी भर ही पेंशन मिलती रहे। आप घर बनवाने के लिए या फिर बीमारी में और बच्चों की पढ़ाई में भी बीच में कुछ पैसे निकाल सकते हैं। परंतु पीएफएफ मे लॉकिन पीरियड ( Lockin Period ) 15 वर्ष का होता है, जिसे कि आप 7वें साल के बाद आंशिक तौर पर पूरे पैसे निकाल सकते हैं।

इस स्कीम ( Scheme ) पर कितनी टैक्स छूट दी जाएगी

हम आपको बता दें, कि इन दोनों स्कीम में निवेश किए गए पैसे तथा उससे मिलने वाले रिटर्न और मैच्योरिटी ( Maturity ) पर मिलने वाली रकम / इन तीनों पर ही बिल्कुल भी टैक्स नहीं लगता। पीएफ ( PF ) के तहत यदि डेढ़ लाख रुपए 1 साल में निवेश हो रहे हैं। तो टैक्स से छूट पाई जा सकती है l जबकि एनपीएस ( NPS ) में भी आपको फॉर्म नंबर 80 C के तहत डेढ़ लाख तथा फॉर्म 80 CD के तहत ₹50000 और फॉर्म 80 CCD के तहत ₹50000 और 80 CCD के तहत सैलरी का ज्यादा से ज्यादा 10 फीसदी और सरकारी कर्मचारियों के मामले में 14 फ़ीसदी तक टैक्स पर छूट मिलेगी।

पीएफ (PF ) तथा एनपीएस (NPS ) में कितना रिटर्न ( Return ) मिलेगा ?

यदि हम बात करें एनपीएस की, तो एनपीएस ( NPS ) एक मार्केट लिंकड ( Markit Linked ) स्कीम है। इसमें निवेश करने वाला व्यक्ति ही यह तय करता है, कि उसे कितना पैसा कहां पर लगाना है। इसमें निवेशकों के पैसे को सरकारी ब्रांड, कॉरपोरेट ग्रैंड तथा अन्य जगहों पर लगाया जाता है। ऐसे में इससे कितना रिटर्न मिलेगा इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। लेकिन फिर भी ऐसा माना जाता है,कि एनपीएस में आपको 10 फ़ीसदी के करीब रिटर्न मिल सकता है। वही यदि हम बात करें पीएफ ( PF ) के बारे में तो पीएफ में आपको 7.1% के हिसाब से 1 साल की ब्याज दर मिलती है।

एनपीएस ( NPS ) तथा पीएफ ( PF ) दोनों में से कहां पर निवेश करना ठीक रहेगा ?

यदि आप बिल्कुल भी रिस्क नहीं लेना चाहते हैं, यदि आप फिक्स रिटर्न ( Fix Return ) चाहते हैं तो आप बिना सोचे समझे पीएफ ( PF ) में निवेश कर सकते हैं। इसमें आपको अच्छा खासा रिटर्न भी मिल जाता है और टैक्स छूट भी मिल जाती है। वही अगर आप रिस्क ( Risk ) उठा कर अच्छा खासा पैसा कमाना चाहते हैं, तो फिर आपके लिए एनपीएस ( NPS ) एक बहुत ही अच्छा विकल्प है। क्योंकि एनपीएस में आपको रिस्क तो लेना पड़ता है,परंतु आपको रिस्क के बदले काफी अधिक रिटर्न मिल सकता है और एनपीएस में पैसे लगाकर अधिक टैक्स से बचने का विकल्प भी मौजूद है।

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