भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी कैसे करे आईएएस

By | May 7, 2020

आईएएस की तैयारी कैसे करे, आईएएस बनने के लिए क्या जरुरी है, भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी किस प्रकार करे, आईएएस के लिए अच्छी कोचिंग कौनसी है, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का पाठय क्रम, आईएएस की बेस्ट कोचिंग की लिस्ट

देष की प्रमुख सेवाओं में सेवा देकर देष की सेवा करने का सपना देखने वाले अधिकतर अभ्यर्थी सिविल सेवाओं की तैयारी करते हैं। हर अभ्यर्थी का सपना होता है कि वह एक आईएएस अधिकारी के रूप में जाना जाए। वैसे तो देष की सेवा में कई महत्वपूर्ण सेवाएं हैं, जिनमें थल, जल एवं वायु सेना प्रमुख हैं। यदि हम पिछले दो दषक का आंकलन करें तो उनमें निजी क्षेत्रों में कई रोजगार के अनेकों अवसरों ने युवाओं को आकर्षित किया है, जो समय के साथ निरंतर बढ़ी हैं।

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वहीं वेतन, सुविधाएं एवं अन्य भत्ते सहित प्राइवेट नौकरियों ने युवाओं को अपने मोहपाष में बांध रखा है। लेकिन फिर भी सिविल सेवाओं का प्रभाव के चलते युवाओं का प्रथम मोह सिविल सेवाएं ही हैं। दरअसल परीक्षाओं की तैयारियां करने वाला अभ्यर्थी सिविल सेवाओं की तैयारी अवष्य करता है,

क्योंकि सिविल सेवाओं की तैयारी के साथ उनकी अन्य सेवाओं की तैयारी भी सम्भव है, लेकिन अन्य सेवाओं की तैयारी के दौरान सिविल सेवाओं की तैयारी करना षायद बहुत मुष्किल है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा का महत्व

किसी भी परीक्षा की तैयारी से पूर्व उसकी प्रकृति का समझना आवष्यक है, क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित आईएसएस पद और उसकी परीक्षा बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय प्रशासनिक सेवा(आईएएस) भारत सरकार की प्रमुख प्रशासनिक नागरिक सेवा है।

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आईएएस, आईपीएस, आईएफएस आदि जैसी 24 सेवाओं में से सबसे अधिक प्रशासनिक पद आईएएस के हैं। भारत देष में यह एक स्थायी नौकरषाही है और कार्यकारी षाखा का एक हिस्सा है। आईएएस तीन अखिल भारतीय सेवाओं में से एक है, इसके संवर्ग को केन्द्र सरकार , राज्य सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के दोनों उपक्रमों द्वारा नियोजित किया जा सकता है।

जिला कलेक्टर(जिलाधिकारी) के रूप में एक पूरे जिले के आईएएस अधिकारी को प्रशासनिक आदेष दिया गया है। अगर दूसरे षब्दों में कहा जाए तो एक जिलाधिकारी पूरे जिले का मालिक होता है, उसकी बिना मर्जी के जिले में कुछ नहीं हो सकता।

आईएएस अधिकारी द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ता में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए इस महत्वपूर्ण एवं गरिमापूर्ण प्रतिनिधित्व के लिए योग्य व्यक्ति का चयन आईएएस परीक्षा के दो चरणों के बाद साक्षात्कार के बाद होता है।

आईएएस परीक्षा के लिए पात्रता मापदंड

आईएएस परीक्षा के लिए पात्रता मापदंड के अनुसार अभ्यर्थी के लिए कई मापदंड दिए गए हैं, जो कि निम्न हैं
ः अभ्यर्थी भारत का नागरिक हो।
ः- नेपाल व भुटान का नागरिक हो।
ः- अभ्यर्थी एक तिब्बती षरणार्थी होना चाहिए जो एक जनवरी 1962 से भारत में स्थायी रूप से रह रहे हों।
ः-भारतीय मूल का होना आवष्यक है जो इथियोपिया, केन्या, मलावी, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका, तंजानिया, युगांडा, वियतनाम, जै़र या जाम्बिया आदि का प्रवासी न हो।

शिक्षण  योग्यता

सिविल सेवाओं की परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी को संघ लोक सेवा आयोग(यूपीएससी) द्वारा षिक्षण पात्रता में योग्य होना आवष्यक है। जो कि निम्न हैं-
ः-अभ्यर्थी के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विष्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि हो
ः-परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए उपस्थित हुए हों और परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हों।
ः-अभ्यर्थी जो अभी तक योग्यता परीक्षा के लिए उपस्थित नहीं है, वे भी प्रारंभिक परीक्षा के लिए पात्र हैं।
ः- इन उम्मीरवारों को मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन के साथ-साथ परीक्षा उत्तीर्ण करने का सबूत देना होगा।

ः-सरकार या इसके समकक्ष द्वारा मान्यता प्राप्त पेषेवर और तकनीकी योग्यता वाले अभ्यर्थी, एमबीबीएस या किसी भी मेडिकल परीक्षा के अंतिम वर्ष में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवार भी आवेदन करने के लिए पात्र हैं। लेकिन अभी तक इन्होंनं इंटर्नषिप पूरी नहीं है।
ः-ऐसे अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए संबंधित विद्यालय से एक प्रमाण पत्र देना होगा कि उन्होंने अंतिम व्यावसायिक चिकित्सा परीक्षा उत्तीर्ण की है।

आईएएस सेवाओं के लिए उम्र सीमा

अभ्यर्थी की उम्र कम से कम 21 साल और एक अगस्त 2017 तक अधिकतम 32 साल की होनी चाहिए। उम्र अधिक होने पर अभ्यर्थियों को छूट जातीय आरक्षण के अनुरूप दिया जाएगा। जो कि निम्न हैः-
सामान्य जाति के अभ्यर्थी की उम्र सीमा 32 वर्ष है।

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वहीं अन्य पिछड़ी जातियां(ओबीसी) के लिए तीन वर्ष की छूट है। इसके अलावा अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए पांच वर्ष की छूट आयोग द्वारा दी गई है। इसके अलावा अक्षम एवं विकलां जैसे अंधे, बहरे, गूंगे आदि अभ्यर्थियों के लिए दस साल की छूट आयोग द्वारा दी गई हैं।

प्रयासों की संख्या

आयोग द्वारा अभ्यर्थियों के कई बार परीक्षा का प्रयास के चलते उन पर 1984 में रोकथाम लगाई गई जिसमें हर वर्ग के लिए प्रयासों की संख्या का निर्धारण किया गया, जो कि निम्न है-
ः- सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए छह प्रयास
ः-अन्य पिछडे़ वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए नौ प्रयास
ः-अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए अगिनत बार प्रयास का प्रावधान किया गया।

कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व

एक आईएएस (जिलाधिकारी) के पास पूरे जिले की कमान होती है। षुरूआत में परीक्षा उत्तीर्ण आईएएस अधिकारी उपडिवीजनल स्तर पर राज्य प्रषासन में षामिल किया जाता है, वह अपनी सेवाओं को उप-विभागीय मैजिस्ट्रेट्स के रूप में ाषुरू करते हैं।

षासन द्वारा सौपें गए क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, सामान्य प्रषासन और विकास कार्य का कार्य करते हैं।जिला स्तर पर एक आईएएस अधिकारी जिले के विकास कार्यों से जुड़े सभी कार्यों में प्रमुखता से निर्वाहन करते हैं।

अधिकारियों को राज्य सचिवालय में भी नियुक्त किया जा सकता है या वे विभाग के प्रमुख या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए कार्य करते हैं।
वहीं केन्द्र में एक आईएएस अधिकारी का चयन एक विषेष क्षेत्र से संबंधित नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए होता है।उदाहरण के लिए वित्त एवं वाणिज्य विभाग आदि। वहीं विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे आईएएस अधिकारी को एक नीति और निर्णय लेने के दौरान संयुक्त सचिव व उप सचिव उनको जरूरी इनपुट देते हैं।

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