{Success Story} गरीब बच्चों को मुफ्त में दे रहे हैं English Medium की Education-पढ़ने के लिए 15 किलोमीटर पैदल चलकर जाते थे |

By | November 16, 2021

गरीब बच्चों को मुफ्त में दे रहे हैं English Medium की Education, श्याम रमाकांत खुद पढ़ने के लिए घर से 15 किलोमीटर दूर जाते थे, श्याम रमाकांत ने अपने पोते के नाम पर रखा स्कूल का नाम-Duggu Ki Pathshala,डुग्गू की पाठशाला में Super 30 Group से बच्चो को प्रवेश दिया जाता है |

हमारे देश में ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्होंने पढ़ाई करने के लिए बहुत मुसीबतें झेली हैं और आज पढ़ लिख कर एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जिसकी वजह से वह सभी के लिए प्रेरणा के पात्र बन गए हैं। पढ़ाई लिखाई ना करने के बहाने तो बहुत होते हैं l लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो लाख नाकामयाबियों के पश्चात भी पढ़ना लिखना नहीं छोड़ते।

आज हम आपको एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बताएंगे l जिसके घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन उसके पश्चात भी उस व्यक्ति के परिजनों ने खूब मेहनत करके उसे अच्छी पढ़ाई दिलाई l यह व्यक्ति शिक्षा प्राप्त करने के लिए 15 किलोमीटर दूर पैदल चलकर पढ़ने के लिए जाता था। इस व्यक्ति का नाम श्याम रांकावत हैं l जब यह सिर्फ 1 महीने की उम्र के थे तो उसी समय इनके पिता की मृत्यु हो गई थी।

Duggu Ki Pathshala news

पिता की मृत्यु हो जाने के पश्चात इनके घर की आर्थिक स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी l जिसके चलते इनकी माता और बड़ी बहन को खूब कष्ट उठाकर मेहनत मजदूरी वाला काम करना पड़ता था। इनकी माता और बहन ने भी खूब मेहनत और मजदूरी करके श्याम रांकावत को पढ़ाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी। उनका मानना था कि वह श्याम रांकावत जी को अच्छी पढ़ाई कराएंगे , ताकि वह अपनी भी गरीबी मिटा सके और दूसरे लोगों को भी शिक्षित कर सके।

माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक बनने के बाद गांव के बच्चों को मुफ्त में दे रहे हैं अंग्रेजी मीडियम की फ्री एजुकेशन

  • श्याम रांकावत की माता और बहन ने उन्हें पढ़ाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी ,मगर उन्होंने भी पढ़ने लिखने के लिए बहुत मेहनत की हैं। वह स्कूल की पढ़ाई के लिए 15 किलोमीटर दूर पैदल चलकर पढ़ने के लिए जाते थे l जब उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली तो उसके बाद में माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक बन गए। शिक्षक बनने के बाद उन्होंने गरीब बच्चों की सहायता करने का सोचा l फिर रांकावत ने यह फैसला लिया कि वह सुमेल गांव के बढ़िया में Middle Class तक English Medium की Free Education देंगे। इसलिए उन्होंने मिडिल क्लास तक गरीब बच्चों को अंग्रेजी मीडियम की फ्री एजुकेशन देनी शुरू कर दी।
  • बच्चों को Free Education देने के लिए रांकावत ने एक स्कूल खोला है और इस स्कूल का नाम उन्होंने ” डुग्गू की पाठशाला ” रखा हैं। वह इस स्कूल में खुद 3 घंटे पढ़ाते हैं और पढ़ाई के साथ-साथ में गांव के लोगों को Bank  तथा Stock Market की भी जानकारी देते हैं ताकि उन्हें Bank और Stock Market के बारे में पूरा ज्ञान हो सकें। श्याम रांकावत का यह मानना है कि बच्चों की नींव बचपन से ही मजबूत होनी चाहिए। क्योंकि बचपन से नींव मजबूत होने पर आगे चलकर बच्चों को पढ़ाई लिखाई में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आती और वें हमेशा ही पढ़ाई के क्षेत्र में अब्बल रहते हैं।

श्याम रांकावत ने अपने पोते के नाम पर रखा है पाठशाला का नाम

श्याम रांकावत के पोते का नाम डुग्गू है l इसीलिए उन्होंने अपने स्कूल का नाम अपने पोते के नाम पर ही ” Duggu Ki Pathshala ” रखा है। दरअसल उनके 2 बेटे हैं l उनका एक बेटा Bank में नौकरी करता है, तो दूसरा बेटा Stock Market  से संबंधित कार्य करता हैं। इसीलिए इनके साथ-साथ इनके दोनों बेटे भी ” Duggu Ki Pathshala ” में गरीब बच्चों को पढ़ाने में मदद करते हैं। उनका एक बेटा बच्चों को Bank का ज्ञान देता हैं, तो दूसरा बेटा Stock Market से संबंधित ज्ञान देता हैं। यह तीनों मिलकर ही बच्चों को इतनी अच्छी तैयारी करवाते हैं कि उन्हें आगे बढ़ने में किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी।

डुग्गू की पाठशाला में Super 30 Group  से होती हैं बच्चों की भर्ती

जो भी छात्र डुग्गू की पाठशाला में पढ़ना चाहते हैं, तो उनकी भर्ती Super 30 Group  से होती हैं। इस पाठशाला में ज्यादातर दलित तथा कमजोर आय वर्ग के बच्चे शामिल हैं l सभी बच्चों को खेल सामग्री , पाठ्यसामग्री तथा इंग्लिश स्पोकन की किताबें दी जाती हैं ताकि वे अपनी पढ़ाई अच्छे से कर सके। बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं जो पढ़ने के लिए किताबें नहीं खरीद सकते, तो इस प्रकार के बच्चों को यहां पर मुफ्त में किताबें दे दी जाती हैं।

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