जानिए आप मंदी से प्रभावित होंगे कि नहीं || भारत में आर्थिक मंदी || ResultUniraj Editorial

By | June 4, 2021

इस वक़्त जब दुनिया की एक तिहाई आबादी कोरोना विषाणु से लड़ने के लिए घरों में लॉकडाउन है तो देश की ही नहीं अपितु विश्व की लगभग व्यापारिक गतिविधियाँ थप है || 1929 ग्रेट डिप्रेशन के बाद यह दुनिया की सबसे भयानक विपदा है | 

भारत में कोरोना की दूसरी लहर के बाद मार्च 2021 से देश के विभिन्न राज्यों में लॉकडाउन लगने शुरू हो गए थे | जैसा की आप सबको विदित है की इस दौरान सिर्फ अति आवश्यक गतिविधियों (Lockdown 2) को ही अनुमति दी गई है जिस से अन्य सभी व्यावासिक प्रतिष्ठान बंद है | हर कोई आने वाले आर्थिक संकट को लेकर चिंतित है |  

इस editorial के लेखक Prashant Kumar है | प्रशांत कुमार राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विश्लेषक है |

अगर ये Article आपको अच्छा लगे तो अपने सभी whatsapp group में जरूर शेयर करे | आपका एक शेयर मुझे और आर्टिकल लिखने के लिए प्रेरित करेगा |

हर कोई ये सोच कर चिंतित है की उस पर या उसकी आमदनी पर या उसकी नौकरी पर या उसके व्यवसाय पर इस का क्या असर होगा ? कौन कौन इस से प्रभावित होगा ? यदि प्रभावित होगा तो कितना और किस तरह प्रभावित होगा ?  चूँकि एक आम नागरिक के लिए इन सब सवालों के जवाब हासिल करना कोई साधारण खेल नहीं है | वह बैंकिंग की कठिन शब्दावली को समझने में असमर्थ है | इसलिए हम आपको समझायेंगे कुछ उद्धारहण के जरिये-

1.    किसान –

भारत एक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है | लेकिन किसान जितना सरल है उतना ही कठिन भी | आप किसान को कुछ इस तरह समझिये – 

जो सिर्फ खेती पर आश्रित है और उसके पास अपनी ज़मीन है लेकिन आय को और कोई साधन नहीं है | यह किसान अपनी इस  वक़्त की फसल तैयार कर चुका है जो की मंडी में बिकने के लिए तैयार है | चूँकि सरकार आधारित मूल्यों और योजनाओं के अंतर्गत यह किसान अपनी फसल बेच सकता है और लगभग हर वर्ष की भांति अपनी उपज का मूल्य प्राप्त कर सकता है | चूँकि यह अपनी ज़मीन का मालिक भी है इसलिए सरकार की सभी योजनाओं का लाभ भी प्राप्त कर सकता है जो सरकार खेतिहर किसान के लिए जारी करती है | 

भारत में आर्थिक मंदी की आशंका

दूसरे वो किसान है जो दूसरे के खेतो में मजदूरी करते है जाहिर सी बात है इस लॉक डाउन में वो सब अपने घर में रहे है और मजदूरी का ये सीजन वो घर पर निकल चुके जिस वजह से उनकी ख़रीद शक्ति में असर होगा जो बाजार की हालत को प्रभावित करेगा 

तीसरे वो किसान है जो खेती भी करते है और परिवार में से कोई या सब, दृश्य या अदृश्य रूप से किसी अन्य स्रोत पर भी आश्रित है | चूँकि इस लॉकडाउन में वो भी उस स्रोत से आय प्राप्त करने में असफल रहे है, सो ये सरे परिवार भी प्रभावित होंगे 

चूँकि गाँवों में किसान छोटी सी अर्थव्यवस्था का मुख्य हिस्सा है सो यदि यह प्रभावित होता है तो सब प्रभावित होंगे 

2. मज़दूर 

भारत में लगभग 30-50 करोड़ मज़दूर है | और इनमे से बहुत से दैनिक आय पर आश्रित मज़दूर है , इनमे से बहुत से प्रवासी मज़दूर भी है मतलब जो कमाने के लिए अपना घर छोड़ कर कही दूसरी जगह मजदूरी कर रहे है, ये मज़दूर इस त्रासदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए है अभी तक |

सरकार इनके लिए काफी योजनाये बना रही है | यदि कोई मज़दूर प्रभावित होता है तो उसकी आय में कमी होती है जिस से उसकी ख़रीद छमता पर भी असर पड़ेगा | अगर ये मजद्दोर वर्ग बाजार में अपनी कटौती करता है तो मंझले दुकानदार और व्यवसायी इस से प्रभावित होंगे ही | कुछ प्रवासी मज़दूर रोज़गार न मिलने के कारण अपने गृह जिले या कस्बे में लौट जायेंगे जिस से उन मकान मालिक की आय पर असर पड़ेगा जहा ये रह रहे थे | 

भारत में ठेले वाले भी बहुत बड़ी तादाद में है | जैसे गोल गप्पे वाले, फ़ास्ट फ़ूड वाले, अंडे वाले, वगैरह वग़ैरा | इनकी आमदनी का जरिया रोजाना हुई बिक्री है, अब कोरोना के बाद हालत सामान्य होने तक इनकी बिक्री में एक बड़ी गिरावट की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता | इन ठेले वालो की आमदनी स्थानीय बाजार को सीधा सीधा प्रभावित करती है | इनकी खरीद क्षमता में कमी कुछ तरीके से निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र को भी प्रभावित करेगी (जैसे की एक ठेले वाला अपने लिए मोबाइल लेता है, या अपने घर पर एक छोटी सी टंकी बनवाता है) 

इन सब की खरीद क्षमता बाजार के मंझले और छोटे व्यापारी के लिए रीढ़ है यदि इसमें कमी होती है तो वो सीधे सीधे ही प्रभावित होता है | 

3. पशुपालक 

भारत में पशुपालन एक मुख्य अव्यय है भारतीय अर्थ का | इस लॉक डाउन के दौरान दूध को आवश्यक श्रेणी में शामिल करके दूध की पूर्ति को जारी रखा गया है लेकिन दूध की खपत कम होने के कारण दूध पर आश्रित पशु पालक इस से  प्रभावित हुआ है ( प्रथम बिंदु में शामिल कुछ किसान खेती के साथ साथ पशुपालन पर भी आश्रित होते है ) | 

 “दूध सिर्फ घरेलु उपयोग में ही नहीं आता अपितु इसकी खपत बाजार में भी काफी होती है | जैसे चाय वाले मिठाई वाले वगैरह | कोरोना के काफी दिन बाद तक बाहर की मिठाई और चाय को पुरानी जगह मिलने  की उम्मीद नहीं की जा सकती | सामाजिक उत्सव जैसे शादी में भी लोग काम इखट्टा होंगे जिस वजह से इसकी बिक्री में काफी कमी रहेगी ” और ये मिडिल क्लास और लोअर क्लास को प्रभावित करेगा ही 

दूसरा वो जो माँस के व्यवसाय पर आश्रित है चूँकि कोरोना के कारन मांस की खपत में काफी कमी हुए है जिसका सीधा असर इन पर पड़ा है | काफी मुर्गी फार्म में मुर्गी की बड़ी तादाद में मौत की खबर पढ़ी जा सकती है | कोरोना के बाद भी हालत सामान्य होने में कुछ टाइम लगेगा जिस दौरान इनकी बिक्री में काफी गिरावट की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता |

4. नौकरी पेशा 

ये भी एक काफी बड़ी तादाद में भारतीय अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी निभाते है | इस क्षेत्र में कई तरह की नौकरियाँ आती है लेकिन उन्हें दो भाग में बाँट कर इसे समझा जा सकता है –

सरकारी और निजी-

सरकारी – सरकारी नौकरी को हमारे यहाँ सबसे सुरक्षित माना जाता है लेकिन मेरा मानना ये है की इस मंदी में सरकार की आमदनी काम होगी | अगर सरकार की आमदनी ही काम होगी तो सरकारी नौकरी के लिए राशि अदा कैसे की जाएगी | तो हो सकता है इनकी नौकरी न जाये लेकिन इनकी सैलरी में कटौती हो सकती है, नयी भर्ती पर एक बार रोक लग सकती है या उसे कुछ समय के लिए आगे खिसकाया जा सकता है, इनके भत्तों में कटौती किस जा सकती है | 

निजी –  निजी नौकरी में भिन्न भिन्न तरह की नौकरी है जैसे MNC (बड़ी कम्पनीज ) में अच्छी सैलरी वाली और साधारण बाजार पर आधारित 

इन सबको  ऐसे समझा जा सकता है – जैसे ऊपर बताया गया है की छोटे और मंझले व्यापारी की आय प्रभावित होगी | अगर उसकी आय प्रभावित होती है तो उसके यहाँ पर काम कर रहे कार्मिको की संख्या में कटौती की जाएगी – जैसे कपड़े की दुकान या मिठाई की दुकान, जहा पर पहले 3 सहायक रहते थे अब वहा  दो या एक ही रखा जाये | जिस मिठाई की दुकान में तीन हलवाई थे वह अब दो हो जाये |

गोल गप्पे की जिस फ़ैक्टरी में 15 मज़दूर थे वह अब 5 हो जाएं | बड़ी कम्पनीज में छंटाई थोड़ी कठिन है समझाना , और इन नौकरियों को सीधा सम्बन्ध भूमि व्यापार (रियल एस्टेट) से है जो बाद में इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रभावित करता है | जहाँ से निर्माण से जुड़ा दैनिक मजदूर प्रभावित होता है | 

अब आप आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए तार समझिये – 

अगर दूध की खपत काम होती है तो चाय वाला , मिठाई वाला , डेरी प्लान्ट पर काम करने वाला मजदूर, डेरी पशु अड्डे पर काम करने वाला मजदूर एंड किसान, दूध को पहुँचाने वाला गाड़ी मालिक और उसका चालक, दूध संग्रहिट करने वाले दुकानदार, दूध वितरित करने वाले दूकानदार, मिठाई बनाने वाले हलवाई, हलवाई की सहायता करने वाले नौकरी वाले, इन सब से जुड़े सहायक सामान वाले जैसे चीनी, चाय, इलायची , मसाले इन सबको बेचने वाले दुकानदार और पैदा करने  वाले किसान – ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए है | 

इन सबसे बाद में दूसरे व्यापारी प्रभावित होते है | जो इनकी खरीद क्षमता से जुड़े है | 

अब एक दूसरे तरह का उद्धारहण समझिये 

कोरोना के बाद कुछ समय तक (जो की कितना लम्बा होगा कुछ कहा नहीं जा सकता ) लोग बाहर खाना खाने में परहेज करेंगे | इसका सीधा  असर रेस्ट्रा इंडस्ट्री पर होगा | अब यदि किसी रेस्ट्रा की बिक्री काम होगी तो जाहिर सी बात है उसके यहाँ काम करने वाले लोगो में कमी हो जाएगी ही | लोग घर से बाहर काम निकलेंगे तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी प्रभावित होगा | ऑनलाइन खाना डिलीवरी वालो  आमदनी भी प्रभावित होगी |

कुछ रेस्ट्रा बंद ही हो जायेंगे क्यों की वो बाद की लागत के साथ बाजार में सर्वाइव नहीं कर सकते | वह पर नौकरी करने वाले सीधे प्रभावित होंगे | यदि बाजार में रेस्ट्रा व्यवसाय में कमी होती है तो जाहिर सी बात है मसाला और सब्जी की ख़रीद में भी कमी होगी जो बाजार के व्यापारी को और किसान को सीधे सीधे प्रभावित करेंगे  

अब हम बात करते है उस इंडस्ट्री की जो इस के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित होगी 

पर्यटन क्षेत्र –

ये वो क्षेत्र है जो इस मंडी के कारण निश्चित रूप से प्रभावित होगा हो होगा और मेरे हिसाब से काफी भरी तरिके से होगा | चूँकि काफी राज्यों की इकॉनमी में पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है जिसमे राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय दोनों पर्यटक शामिल है | कोरोना का असर पुरे विश्व में हुआ है और काफी देश इसके कारण बहुत भयंकर रूप से प्रभावित हुए है जैसे इटली , स्पेन, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, ईरान, चीन, वगैरह |

अब इन काफी देशों की खुद की अर्थ व्यवस्था कमजोर होने के कारण और कोरोना के डर की वजह से पर्यटक क्षेत्र पर व्यापक असर होगा | अगर पर्यटन काम होता है तो एयर लाइन कम्पनीज को  घाटा होगा जो उन्हें छंटनी की तरफ ले जा सकता है | पर्यटक काम होने से होटल इंडस्ट्री सीधे तौर से प्रभावित होती है और उनकी भी नौकरी प्रभावित होती है | पर्यटन के कारण चलने वाले काफी प्रतिष्ठान मंदे पड़ सकते है |

जैसे समुद्र बीच के पास चलने वाले रेस्त्रां, होटल और सड़क पर लगने वाले स्टाल | ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री भी पर्यटक पर काफी निर्भर होती है | अगर इनकी संख्या काम होती है तो उनकी आमदनी पर भी सीधा असर होगा | ओला और उबेर जेसीसी कैब ऑपरेटर सीधे सीधे प्रभावित हो रहे है और इनके ड्राइवर अप्रत्यक्ष रूप से | 

अब बात करते है मैन्युफैक्चरिंग एंड इलेक्ट्रॉनिक बाजार की –

इस बाजार में कुछ सामान अति आवश्यक और कुछ सुविधा की श्रेणी में आता है – चूँकि हमें आवश्यक सामान खरीदना ही होता है (अगर समर्थ है तो ) लेकिन सुविधा वाले सामान को टाला जा सकता है | जैसे किसी को अपने बच्चे के लिए साइकिल लेनी थी लेकिन अब वो इस जरूरत को अगले कुछ समय के लिए ताल सकता है | कोई गाड़ी लेने की योजना बना रहा था लेकिन अब वो अगले कुछ महीनों के लिए इस योजना को खिसका सकता है (समर्थ होते हुए भी, बाजार के डर से, नौकरी के डर से ) |

कोई अपनी बच्ची की शादी में ख़र्चा करने का इच्छुक था लेकिन अब वो इस खर्च में से कुछ कटौती कर सकता है या फिर इस उत्सव को कुछ समय के लिए आगे खिसका सकता है | कोई मोबाइल बदलने का इच्छुक था लेकिन अब कोई आय न होने से उसी मोबाइल के साथ काम चला रहा है  ऐसे अनेक उद्धारहण है जो आपको एक दूसरे से जुड़ा हुआ दिखा देंगे | 

follow us for social updates

2 thoughts on “जानिए आप मंदी से प्रभावित होंगे कि नहीं || भारत में आर्थिक मंदी || ResultUniraj Editorial

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *